जाने राधा अष्टमी क्यों मनाया जाता है।

इससे पहले बता दे की अष्टमी 3 सितम्बर 12:25 से लेकर 4 सितम्बर सुबह 10:40 मिनट तक है।

राधा अष्टमी के पीछे बहुत ही दिलचप कहानी छिपी हुए है।

हमारी पारम्परिक कथा के अनुसार, माता राधा स्वर्ग लोक से कही बहार गयी थी।

तभी हमारे भगवान् कृष्णा विरजा जो की उनकी एक सखी है।

उनके साथ विहर कर रहे थे,  मतलब बात कर रहे थे।

जब माता राधा वापस आए तोह दोनों को एक साथ देख कर उनको बहुत बुरा लगा।

और विरजा को बहुत बुरा भला बोल दिया।

विरजा वहाँ से दुखी होकर चली गयी।

ये सब देख कर भगवान् मित्र सुदामा को बहुत बुरा लग, और राधा से नाराज हो गए।

सुदामा का ऐसा वयवहार देख, माता राधा को फिर से गुस्सा आया और सुदामा को श्राप दे दिया की,

सुदामा को जन्म रक्षक में होगा। फिर क्या सुदामा जी क्रोधित हुए और माता राधा को भी श्राप दे दिया की,

राधा का जन्म मनुष्य में होगा।

जिससे उनका जन्म मनुष्य में हुआ और उनको कृष्णा से अलग होना पड़ा।

सुदामा शंखचूड़ नामक दानव बने,

सुदामा शंखचूड़ नामक दानव बने, जिसका वध भगवान शिव ने किया

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